संलग्नीकरण समाप्ति के निर्देशों के बीच बड़ा सवाल: 36 शिक्षक-अधीक्षकों को मिलेगा अभयदान या लौटेंगे मूल पद पर?

ऑनलाइन उपस्थिति और स्कूल में पढ़ाई के दोहरे नियम से गहराया व्यावहारिक संकट
सारंगढ़-बिलाईगढ़।राज्य सरकार द्वारा शासकीय विभागों में वर्षों से जारी अटैचमेंट प्रणाली’ (संलग्नीकरण) को पूरी तरह समाप्त कर कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इस आदेश के परिपालन में जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के दर्जनों शिक्षकों को अन्य विभागों के प्रभार से मुक्त कर मूल शालाओं में वापस भेज दिया गया है।
हालांकि, इस सख्त रुख के बावजूद जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग (ट्रायबल डिपार्टमेंट) के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की व्यवस्था कैसे होगी। क्या है जमीनी आंकड़ा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत लगभग 82 छात्रावास एवं आश्रम संचालित हैं। इन हॉस्टलों के संचालन
ट्रायबल विभाग के अपने कर्मचारी: 43 हॉस्टल शिक्षा विभाग के शिक्षक (बतौर अधीक्षक पदस्थ) लगभग 36 हॉस्टल जहाँ एक ओर अन्य विभागों में संलग्न शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से मूल शालाओं में भेजने के आदेश जारी हो चुके हैं, वहीं इन 36 हॉस्टल अधीक्षकों को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिक्षा जगत और आम जनता के बीच अब यह ‘यक्ष प्रश्न’ बना हुआ है कि क्या इन 36 शिक्षकों को विशेष छूट अभयदान दिया जाएगा या इन्हें भी मूल पदस्थापना पर भेजा जाएगा? एक शरीर, दो ड्यूटी: व्यावहारिक रूप से कैसे संभव है यह व्यवस्था? विभाग द्वारा हॉस्टल अधीक्षकों के लिए जारी नए निर्देशों ने इस पूरे मामले को और अधिक उलझा दिया है। शासन के नियमानुसार:हॉस्टल अधीक्षक (शिक्षक) को सुबह हॉस्टल पहुंचकर ऑनलाइन जीपीएस उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य है।इसके ठीक बाद उन्हें अपनी मूल शाला में जाकर बच्चों को पढ़ाना है।शाम को पुनः हॉस्टल प्रबंधन और बच्चों की देखरेख का जिम्मा संभालना है।बड़ा सवाल: जब शिक्षक की मूल पदस्थापना शाला और छात्रावास के बीच कई किलोमीटर का फासला हो, तो कोई कर्मचारी एक ही समय में दो स्थानों पर पूर्ण निष्ठा और गुणवत्ता के साथ कार्य कैसे कर सकता है ऑनलाइन उपस्थिति की औपचारिकता पूरी करने के चक्कर में न तो छात्रावास का प्रबंधन सही ढंग से हो पाएगा और न ही स्कूल में अध्यापन कार्य।
अब आगे क्या?
प्रशासनिक गलियारों में इस बात की तेज चर्चा है कि यदि संलग्नीकरण समाप्त करने का नियम सभी पर समान रूप से लागू होता है, तो आदिम जाति कल्याण विभाग के हॉस्टलों में पदस्थ शिक्षकों को इससे अलग क्यों रखा जा रहा है? यदि ट्रायबल विभाग के पास अपने कर्मचारियों की कमी है, तो विभाग को नई भर्ती या वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, न कि शिक्षा व्यवस्था को दांव पर लगाकर शिक्षकों से हॉस्टल का प्रभार दिलवाया जाए। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस व्यावहारिक विसंगति पर क्या कड़ा कदम उठाता है।