जेवरा PDS भाग-2: रिकॉर्ड में सैकड़ों क्विंटल चावल फिर भी आवंटन जारी

स्टॉक रजिस्टर से ऑनलाइन रिकॉर्ड तक…आखिर कहां है 650 क्विंटल से अधिक चावल? जांच हुई तो खुल सकता है बड़ा राज
सारंगढ़-बिलाईगढ़। जेवरा PDS दुकान में 650 क्विंटल से अधिक चावल का शेष स्टॉक दर्ज होने की जानकारी के बाद अब मामला और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। सवाल सिर्फ स्टॉक का नहीं बल्कि उस प्रक्रिया का भी है जिसके तहत शेष स्टॉक होने के बावजूद नया मूल आवंटन जारी किया जा रहा है।
अगर रिकॉर्ड में सैकड़ों क्विंटल चावल पहले से मौजूद है,तो क्या संबंधित विभाग द्वारा आवंटन जारी करने से पहले स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया? अगर सत्यापन हुआ है तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? और अगर सत्यापन नहीं हुआ,तो इतनी बड़ी मात्रा में स्टॉक दर्ज होने के बावजूद आवंटन किस आधार पर जारी किया गया?
रिकॉर्ड बनाम हकीकत
PDS व्यवस्था में स्टॉक रजिस्टर,ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक भौतिक स्टॉक के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में जेवरा PDS के मामले में इन तीनों का मिलान कराया जाना जरूरी है।
रिकॉर्ड में 650 क्विंटल से अधिक चावल लेकिन मौके पर कितना?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
यदि मौके पर स्टॉक मौजूद है,तो उसका भौतिक सत्यापन और पंचनामा सामने आना चाहिए। वहीं यदि रिकॉर्ड में स्टॉक दर्ज है लेकिन मौके पर उतनी मात्रा नहीं मिलती,तो इसकी जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
विभाग की भूमिका पर सवाल
अब सवाल खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहा है। क्या विभाग नियमित रूप से PDS दुकानों का निरीक्षण करता है? क्या स्टॉक का मिलान मौके पर जाकर किया जाता है? और यदि किया जाता है, तो जेवरा दुकान में इतना बड़ा शेष स्टॉक विभाग की नजर में कैसे आया या अब तक क्यों नहीं आया?
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्टॉक रजिस्टर,ऑनलाइन पोर्टल की एंट्री, मासिक आवंटन,वितरण की मात्रा और भौतिक स्टॉक का एक साथ मिलान होना जरूरी है।
बड़ा सवाल
650 क्विंटल से अधिक बताया जा रहा शेष चावल आखिर कहां है?
क्या यह पूरा स्टॉक वास्तव में गोदाम में मौजूद है?
क्या हर महीने जारी हुआ मूल आवंटन नियमों के अनुसार था?
क्या विभाग ने कभी इसका भौतिक सत्यापन किया?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल मामला सवालों के घेरे में है। अब देखना होगा कि खाद्य विभाग इस पूरे मामले में रिकॉर्ड की जांच और मौके का भौतिक सत्यापन कब कराता है।
भाग-3 में सामने रखेंगे स्टॉक रिकॉर्ड, आवंटन और वितरण से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पूरा हिसाब।