आशा साहू पर गंभीर आरोप निलंबन की जगह तबादला! जिला पंचायत की कार्रवाई पर उठे सवाल

कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच आशा साहू का तबादला निलंबन क्यों नहीं? जिला पंचायत की कार्रवाई पर उठे सवाल
सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिला पंचायत सारंगढ़-बिलाईगढ़ में प्रार्थना संकुल संगठन पवनी की अध्यक्ष एवं पीआरपी आशा साहू से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, जिला पंचायत कार्यालय ने 7 अक्टूबर 2026 को आशा साहू को कारण बताओ सूचना जारी कर तीन दिनों के भीतर साक्ष्य सहित लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। वहीं, 16 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में उनका स्थानांतरण कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गंभीर आरोपों के बीच निलंबन जैसी कार्रवाई के बजाय तबादले का रास्ता क्यों अपनाया गया?
जांच रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर उठाए गए सवाल
जिला पंचायत के कारण बताओ नोटिस में संकुल संगठन की सामग्री खरीदी, राशि भुगतान कथित अनियमितताओं और संगठन की राशि के उपयोग से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। नोटिस में संबंधित जांच प्रतिवेदन के आधार पर आशा साहू से स्पष्टीकरण मांगा गया था।
दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि कुछ सामग्री खरीदी के बिल एवं सत्यापन से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने और संकुल संगठन के अभिलेखों के संधारण को लेकर सवाल उठाए गए।
₹50 हजार की राशि को लेकर भी सवाल
कारण बताओ नोटिस में राशि भुगतान से संबंधित एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ₹1.30 लाख की राशि दर्ज होने के बावजूद ₹80 हजार दिए जाने की बात सामने आई और शेष ₹50 हजार को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। नोटिस में इस राशि को वसूली योग्य बताए जाने का भी उल्लेख है।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का अंतिम जवाब और जांच के अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट नहीं होते। इसलिए आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित विभाग की जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही मानी जा सकती है।
जिला पंचायत की कार्रवाई पर सवाल
16 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार आशा साहू सहित चार पीआरपी के पदस्थापना स्थल में बदलाव किया गया। आशा साहू को बिलाईगढ़ जनपद के प्रार्थना सीएलएफ पवनी से बरमकेला जनपद के अराधना सीएलएफ कान्दुरपाली में पदस्थ किया गया।

इसी आदेश में अन्य तीन पीआरपी के स्थानांतरण का भी उल्लेख है। आदेश में स्थानांतरण को तत्काल प्रभावशील बताया गया है।
निलंबन की जगह तबादला क्यों?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभागीय नोटिस में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर बिंदु उठाए गए थे तो विभाग ने निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई के बजाय स्थानांतरण का निर्णय क्यों लिया? क्या जांच पूरी हो चुकी है? क्या आशा साहू ने कारण बताओ नोटिस का जवाब प्रस्तुत किया? क्या कथित बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू हुई है?
इन सवालों पर जिला पंचायत प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। संबंधित अधिकारी का पक्ष और जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
अब निगाहें जिला पंचायत प्रशासन पर हैं कि आरोपों की जांच में आगे क्या कार्रवाई होती है और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जवाबदेही कैसे तय की जाती है।